दिनांक और समय के आधार पर वैदिक पंचांग के सक्रिय करण, नित्य योग, समय सीमा और भद्रा विवरण जानें
स्वामी देवता: इन्द्र (Indra) | प्रतीक: सिंह (Lion)
बव करण को शुभ कार्यों, आरोग्य लाभ, नए व्यवसाय के आरंभ, यात्रा तथा सामाजिक व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रकृति: सफल व सिद्धिदायक
सिद्धि योग में किया गया कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, नया संकल्प अथवा व्यवसाय सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।
विष्टि करण को ज्योतिष में 'भद्रा' कहा जाता है। इसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
चयनित दिनांक के दौरान होने वाले सभी करण एवं नित्य योग के आरंभ व समाप्ति का समय:
एक चन्द्र मास (30 तिथियों) में कुल 60 करण होते हैं। इनमें से 7 चर करण (8 बार पुनरावृत्त) और 4 स्थिर करण होते हैं:
| करण का नाम | प्रकार | स्वामी देवता | प्रतीक / योनि | प्रकृति | उपयुक्त कार्य |
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सूर्य और चन्द्रमा के निरयण स्पष्ट भोगांश के योग से 27 नित्य योग बनते हैं (प्रत्येक 13° 20'):
| योग सं. | योग का नाम | स्वामी / देवता | प्रकृति / फल | मुहूर्त महत्व |
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